आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के प्रयासों से बदली तस्वीर, स्कूल जाने से इनकार करने वाला सिद्धू भी अब नियमित रूप से जा रहा विद्यालय
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाल अधिकारों की दिशा में एक सकारात्मक पहल सामने आई है। तिल्दा विकासखंड के ग्राम सिनोधा की सपेरा बस्ती में शिक्षा से दूर रह रहे 21 बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया गया है। इनमें सिद्धू नाम का एक बच्चा भी शामिल है, जो पहले स्कूल जाने को तैयार नहीं था। लगातार समझाइश और शिक्षकों के सहयोग से अब सिद्धू भी नियमित रूप से विद्यालय जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की बाल चौपाल के जरिए बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में सफलता मिली है।
यह मामला 10 जुलाई 2026 को ग्राम सिनोधा की सपेरा बस्ती में लगी बाल चौपाल के दौरान सामने आया था। यहां कई बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। कुछ बच्चों के पास आधार कार्ड सहित जरूरी दस्तावेज नहीं थे, जिससे वे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से भी वंचित थे। वहीं, कुछ अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं थे। बच्चों की इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले में प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए।
इसके बाद 17 जुलाई को आयोग में प्रकरण दर्ज कर शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई। बच्चों और उनके अभिभावकों से लगातार बातचीत की गई। उन्हें शिक्षा के महत्व और बच्चों के भविष्य के लिए इसकी जरूरत समझाई गई। साथ ही जरूरी दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया पूरी कराई गई। इन प्रयासों के बाद बस्ती के 20 बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया गया।
हालांकि, सिद्धू को स्कूल भेजने के लिए उसके परिवार को तैयार करना आसान नहीं था। बच्चा खुद भी विद्यालय जाने के लिए तैयार नहीं था और उसके अभिभावक भी इसके पक्ष में नहीं थे। इसके बावजूद आयोग ने प्रयास जारी रखे। लगातार समझाइश, शिक्षकों के सहयोग और विकासखंड शिक्षा अधिकारी लीलाधर सिन्हा की सक्रियता से आखिरकार सिद्धू और उसके परिवार को राजी किया गया। 22 अक्टूबर को उसका भी स्कूल में दाखिला हो गया। अब वह लगातार तीन दिनों से नियमित रूप से विद्यालय जा रहा है।
26 अक्टूबर को आयोग में मामले की चौथी सुनवाई के दौरान इस सफलता पर चर्चा हुई। आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने सिद्धू और विकासखंड शिक्षा अधिकारी लीलाधर सिन्हा से बातचीत की। उन्होंने सिद्धू को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में किए गए प्रयासों के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी लीलाधर सिन्हा को आयोग कार्यालय में सम्मानित किया गया।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि हर बच्चे को शिक्षा पाने का समान अधिकार है। आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियां, जरूरी दस्तावेजों की कमी या पारिवारिक समस्याएं किसी बच्चे की पढ़ाई में बाधा नहीं बननी चाहिए। बाल अधिकारों की रक्षा का मतलब केवल बच्चों की समस्याएं सुनना नहीं, बल्कि उनका समाधान होने तक प्रयास करना भी है। उन्होंने कहा कि बाल चौपाल का उद्देश्य बच्चों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें उनके अधिकारों से जोड़ना है। सिनोधा की सपेरा बस्ती में 21 बच्चों का स्कूल में दाखिला इसी सामूहिक प्रयास का नतीजा है।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी लीलाधर सिन्हा ने भी इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को स्कूल तक लाना चुनौतीपूर्ण था, जो पढ़ाई के लिए तैयार नहीं थे या जिनके अभिभावक उन्हें विद्यालय भेजना नहीं चाहते थे। इस काम में बाल आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, शिक्षा विभाग, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के सहयोग से सफलता मिली। अब ये बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं और उन्हें आगे भी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
