रायपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद छत्तीसगढ़ में जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें फिर से सूची में जोड़ने के लिए एक महीने का विशेष अभियान शुरू किया गया है। राज्य में ऐसे करीब 19 लाख नाम बताए जा रहे हैं। अभियान का सीधा मतलब है कि जिन लोगों का नाम सूची में नहीं है, उनके पास अब उसे दोबारा जुड़वाने का मौका है।
यह अभियान ऐसे समय शुरू हुआ है जब पूरे देश में SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर निर्वाचन आयोग पर सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को व्यवस्थित और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने के लिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया की जा रही है। इसलिए छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ यह अभियान राजनीतिक विवाद से अलग आम मतदाता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसी व्यक्ति को कैसे पता चले कि उसका नाम मतदाता सूची में है या नहीं। मतदाताओं को अपनी जानकारी की जांच करनी चाहिए। अगर नाम सूची में नहीं मिलता है और व्यक्ति मतदान के लिए पात्र है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया जा सकता है। नए 18 वर्ष के मतदाताओं के लिए भी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का अवसर है।
इस पूरी प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। स्थानीय स्तर पर मतदाताओं को सूची में नाम की स्थिति और आवेदन की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी जाएगी। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को केवल यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि वर्षों से वोट डालते आ रहे हैं तो इस बार भी नाम अपने आप सूची में होगा।
खासकर बुजुर्ग मतदाता, किराए के मकान में रहने वाले लोग, लंबे समय से बाहर रहने वाले परिवार, पता बदल चुके मतदाता और पहली बार वोट देने वाले युवाओं को अपनी जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। दूसरे राज्यों में SIR के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां लंबे समय से मतदान कर रहे लोगों को भी सूची में अपना नाम नहीं मिला। इससे यह साफ है कि मतदाता सूची की जांच को केवल चुनाव के समय की जरूरत मानना ठीक नहीं होगा।
इस अभियान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का 7 और 8 अक्टूबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरा भी टाल दिया गया है। निर्वाचन आयोग की ओर से दौरे की नई तारीख बाद में घोषित किए जाने की बात कही गई है। यह घटनाक्रम दिल्ली में SIR को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन के बीच सामने आया है।
हालांकि इस पूरे मुद्दे को केवल राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय मतदाता के अधिकार के नजरिए से देखना ज्यादा जरूरी है। चुनाव में मतदान का अधिकार तभी प्रभावी है जब मतदाता का नाम सही तरीके से सूची में दर्ज हो। इसलिए जिन लोगों को अपने नाम को लेकर कोई संदेह है, उन्हें अभी जांच कर लेनी चाहिए, न कि चुनाव की घोषणा का इंतजार करना चाहिए।
छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ यह एक महीने का अभियान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि SIR के बाद छूटे नामों को फिर सूची में लाने का रास्ता खुल रहा है। अब चुनौती यह है कि पात्र मतदाता तक इसकी जानकारी पहुंचे और कोई भी वास्तविक मतदाता केवल प्रक्रिया की जानकारी या दस्तावेज की कमी के कारण अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।
आपके काम की बात
अगर आपने पहले वोट दिया है, लेकिन अब मतदाता सूची में नाम को लेकर संदेह है, तो अभी अपनी जानकारी जांचें। नाम नहीं मिलने पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी या BLO से संपर्क कर नाम जोड़ने की निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी लें। पहली बार वोट देने वाले 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के युवाओं को भी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
