रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है। 18 अगस्त को हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद प्रदेश के 33 में से 12 जिलों में महिला IAS अधिकारी कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यानी राज्य के करीब 36 प्रतिशत जिलों की कमान अब महिला अधिकारियों के हाथों में है। इसे छत्तीसगढ़ के जिला प्रशासन में महिला नेतृत्व की अब तक की सबसे बड़ी मौजूदगी बताया जा रहा है।
18 अगस्त को राज्य सरकार ने 22 IAS अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापनाएं की थीं। इसी फेरबदल में सक्ती, कबीरधाम और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में महिला अधिकारियों को कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई। इसके साथ ही प्रदेश में महिला कलेक्टरों की संख्या 12 हो गई।
इन 12 जिलों में महिला कलेक्टर
वर्तमान पदस्थापना के अनुसार महिला IAS अधिकारियों के नेतृत्व वाले जिलों की सूची इस प्रकार है:
कोंडागांव – नूपुर राशि पन्ना
बेमेतरा – प्रतिष्ठा ममगाई
नारायणपुर – नम्रता जैन
बालोद – दिव्या मिश्रा
सूरजपुर – रेना जमील
सक्ती – जयश्री जैन
कबीरधाम – तुलिका प्रजापति
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी – तनुजा सलाम
सारंगढ़-बिलाईगढ़ – पद्मिनी भोई साहू
बलरामपुर-रामानुजगंज – चंदन संजय त्रिपाठी
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – संतन देवी जांगड़े
कोरिया – रोक्तिमा यादव
तीन जिलों में नई महिला कलेक्टरों की एंट्री
हालिया फेरबदल में तीन महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। 2016 बैच की IAS अधिकारी जयश्री जैन को सक्ती जिले का कलेक्टर बनाया गया है। वहीं मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की तत्कालीन कलेक्टर तुलिका प्रजापति को कबीरधाम भेजा गया है।
इसके अलावा खेल एवं युवा कल्याण विभाग की निदेशक के रूप में काम कर रहीं तनुजा सलाम को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का नया कलेक्टर बनाया गया है। इन नियुक्तियों के साथ ही महिला कलेक्टरों की संख्या 12 तक पहुंची।
सिर्फ संख्या नहीं, जिलों का भौगोलिक विस्तार भी खास
इस बदलाव की खास बात केवल महिला कलेक्टरों की संख्या नहीं है। महिला अधिकारी प्रदेश के अलग-अलग भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियों वाले जिलों का नेतृत्व कर रही हैं।
नारायणपुर और कोंडागांव जैसे बस्तर क्षेत्र के जिले, बलरामपुर और सूरजपुर जैसे सरगुजा संभाग के क्षेत्र, साथ ही मध्य छत्तीसगढ़ के बेमेतरा और बालोद जैसे जिले इस सूची में शामिल हैं। यानी महिला प्रशासनिक नेतृत्व किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
कलेक्टर की जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है?
जिला कलेक्टर जिले के प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजस्व प्रशासन, विकास योजनाओं की निगरानी, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में समन्वय, आपदा प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल जैसे कई महत्वपूर्ण काम जिला प्रशासन के स्तर पर कलेक्टर की निगरानी में होते हैं।
इस लिहाज से 33 में से 12 जिलों में महिला IAS अधिकारियों की मौजूदगी प्रशासनिक नेतृत्व में महिला भागीदारी के बढ़ते स्तर को दिखाती है।
क्या यह महिला सशक्तिकरण का संकेत है?
प्रशासनिक पदों पर महिलाओं की बढ़ती संख्या को महिला नेतृत्व के विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि किसी अधिकारी के प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल उनकी नियुक्ति के आधार पर नहीं किया जा सकता। किसी कलेक्टर की वास्तविक प्रशासनिक प्रभावशीलता का आकलन उनके कार्यकाल में योजनाओं के क्रियान्वयन, सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति और स्थानीय प्रशासन के परिणामों से होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में जिला स्तर पर महिला IAS अधिकारियों की संख्या रिकॉर्ड 12 तक पहुंच गई है और पहली बार राज्य के एक-तिहाई से अधिक जिलों में महिला अधिकारी कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
