एग्रीस्टेक पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे की गड़बड़ियों पर भी जताई चिंता, सरकार पर किसानों को परेशान करने का आरोप
महासमुंद। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर सियासत तेज हो गई है। महासमुंद के पूर्व विधायक और पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने 27 अक्टूबर को साय कैबिनेट की बैठक में लिए गए धान खरीदी संबंधी फैसले को किसान विरोधी और निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को पिछले तीन साल से धान का एक ही दाम देकर उनके साथ अन्याय कर रही है।
विनोद चंद्राकर ने कहा कि पिछले तीन साल में केंद्र सरकार ने धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में करीब 380 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। उनके मुताबिक, इस बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए किसानों को इस साल कम से कम 3500 रुपये प्रति क्विंटल की दर मिलनी चाहिए थी। लेकिन राज्य सरकार ने 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का फैसला लिया है। उन्होंने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया।
चंद्राकर ने कहा कि सरकार 15 नवंबर से 27.50 लाख किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से धान खरीदी करने की बात कह रही है, लेकिन कीमत में बढ़ोतरी नहीं की गई है। उनका आरोप है कि खरीदी की मात्रा और केंद्रों की संख्या बढ़ाने की बात के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
एग्रीस्टेक पंजीयन और रकबे की गड़बड़ियों पर चिंता
पूर्व विधायक ने एग्रीस्टेक पंजीयन अनिवार्य किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन किसानों का किसी कारण से पंजीयन नहीं हो पाया है, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कई किसान धान बेचने से वंचित हो सकते हैं।
उन्होंने डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) के जरिए खेतों के रकबे का ऑनलाइन निर्धारण किए जाने पर भी चिंता जताई। चंद्राकर के अनुसार, खसरा और रकबे से जुड़ी विसंगतियों के कारण किसानों को परेशानी हो सकती है। यदि समय पर त्रुटियों में सुधार नहीं हुआ, तो किसानों को धान बेचने में दिक्कत आएगी।
खरीदी केंद्र बढ़ाने से पहले व्यवस्था सुधारने की मांग
विनोद चंद्राकर ने कहा कि सरकार 360 नए केंद्र खोलने, कुल 3100 केंद्रों पर खरीदी करने और बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था की बात कर रही है। लेकिन उनके मुताबिक, यदि किसान के खेत का रकबा ही गलत दर्ज होगा, तो वह निर्धारित मात्रा में धान कैसे बेच पाएगा।
उन्होंने आशंका जताई कि सर्वे की गड़बड़ियों के कारण गांवों में विवाद की स्थिति बन सकती है और दस्तावेजों में सुधार कराने में ही खरीदी का काफी समय निकल सकता है। चंद्राकर ने सरकार से धान का बेहतर मूल्य देने और एग्रीस्टेक पंजीयन व डिजिटल क्रॉप सर्वे से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था करने की मांग की है।
