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रायपुर। करीब 20 साल लंदन में बिताने के बाद भारत लौटे अभिषेक नाखाते अब लोगों की समस्याओं का हल तलाशने की कोशिश में जुटे हैं। उन्होंने ‘सॉल्व इंडिया’ नाम से एआई आधारित मुहिम शुरू की है, जिसकी शुरुआत छत्तीसगढ़ से हुई है। 15 अगस्त से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 500 से ज्यादा लोग अपनी समस्याएं साझा कर चुके हैं।
‘सॉल्व इंडिया’ के जरिए लोगों की समस्याओं को सामने लाने और उनके समाधान तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। इसकी शुरुआत छत्तीसगढ़ से की गई है और प्रदेश के 22 शहरों से लोग इससे जुड़ चुके हैं। लंदन और विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की ओर से भी इस पहल को अच्छा सहयोग मिलने की बात कही गई है।
हर 5.6 मिनट में जुड़ रहे नए लोग
अभियान शुरू होने के शुरुआती घंटों में ही लोगों ने इसमें रुचि दिखाई। मुहिम के अनुसार, करीब हर 5.6 मिनट में एक नया व्यक्ति इससे जुड़ रहा था। खास बात यह है कि किसी तरह की अनिवार्यता नहीं होने के बावजूद 71 प्रतिशत लोगों ने खुद आगे आकर अपना नाम साझा किया।
व्हाट्सएप पर बताएं अपनी समस्या
इस मुहिम की खास बात यह है कि लोगों को अपनी बात रखने के लिए किसी लंबे फॉर्म या कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। अभियान के मुताबिक, लोग व्हाट्सएप के जरिए सीधे अपनी समस्या बता सकते हैं। इसके साथ ही वे अपनी ओर से समाधान का सुझाव भी साझा कर सकते हैं। व्हाट्सप्प नंबर है – 9284165502
बस्तर में जन्मे, 20 साल लंदन में रहे
अभिषेक नाखाते का जन्म बस्तर के आकाश नगर में हुआ और उनका बचपन भी वहीं बीता। उनकी माता कमल नाखाते और पिता विजय कुमार नाखाते हैं। इसके बाद वे करीब 20 साल लंदन में रहे। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग स्कूल-कॉलेजों को देखा और कई तरह के कारोबार को करीब से समझा।
कोविड के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। अभिषेक के मुताबिक, यहां आने के बाद उन्हें लगा कि लोगों के सामने समस्याएं तो बहुत हैं, लेकिन उन समस्याओं का हल तलाशने पर उतनी चर्चा नहीं होती। अक्सर लोग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते रहते हैं। इसी सोच ने उन्हें ऐसा मंच शुरू करने के लिए प्रेरित किया, जहां समस्या बताने के साथ उसके समाधान पर भी बात हो सके।
देशभर के 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य
‘सॉल्व इंडिया’ को गैर-राजनीतिक और गैर-धार्मिक नागरिक मुहिम बताया गया है। अब इसे देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की तैयारी है। अभियान का लक्ष्य 10 लाख लोगों तक पहुंचना है।
अभियान से जुड़े लोगों के मुताबिक, कोशिश है कि जिन लोगों के पास कोई समस्या है, उन्हें ऐसे लोगों से जोड़ा जाए जो उसका समाधान सुझा सकते हैं। फिलहाल टीम को मिली समस्याओं पर लोगों के साथ मिलकर समाधान तलाशने का काम किया जा रहा है।
