रायपुर। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने अपने आवंटियों और हितग्राहियों को राहत देने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। प्राधिकरण के अध्यक्ष नंद कुमार साहू की अध्यक्षता और उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा की मौजूदगी में हुई संचालक मंडल की बैठक में किश्त जमा करने की समय-सीमा बढ़ाने, बकाया राशि पर सरचार्ज घटाने, निर्माण कार्यों की DLP अवधि बढ़ाने और प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों की लॉक-इन अवधि को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
सबसे बड़ी राहत यह है कि RDA की पूर्ण हो चुकी योजनाओं में राशि जमा करने के लिए अब आवंटियों को 45 दिन की जगह 60 दिन का समय मिलेगा। बैंक से ऋण स्वीकृत कराने और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को देखते हुए यह फैसला किया गया है। इससे उन हितग्राहियों को फायदा होगा जिन्हें तय 45 दिन की अवधि में भुगतान की व्यवस्था करने में परेशानी होती थी।
निर्माण में देरी होने पर भी आवंटियों को राहत मिलेगी। अब किश्त की राशि निर्माण कार्य की वास्तविक भौतिक प्रगति के आधार पर तय की जाएगी। यदि किसी भवन का निर्माण निर्धारित समय पर पूरा नहीं होता है तो किश्त की तारीख का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। निर्माण में हुई देरी की अवधि के लिए आवंटियों से ब्याज नहीं लिया जाएगा। यानी प्राधिकरण की तरफ से हुई देरी का आर्थिक बोझ हितग्राहियों पर नहीं डाला जाएगा।
बकाया राशि पर लगने वाले सरचार्ज में भी कमी की गई है। अभी 12 प्रतिशत सरचार्ज लागू है, जिसे घटाकर 10 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। प्राधिकरण का मानना है कि इससे बकायेदारों को राहत मिलेगी और लंबित राशि के भुगतान में तेजी आएगी। इससे प्राधिकरण की बकाया राशि की वसूली में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। RDA की आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं में वर्तमान में निर्माण की प्रकृति के अनुसार 1 से 3 वर्ष तक की Defect Liability Period यानी DLP निर्धारित है। अब इसे बढ़ाकर 5 वर्ष तक किया जाएगा। इसका मतलब है कि निर्माण में कमी या दोष सामने आने पर संबंधित निर्माण एजेंसी की जवाबदेही लंबे समय तक तय की जा सकेगी। इससे आवंटियों के हितों की सुरक्षा मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने आवासों की 10 साल की विक्रय-प्रतिबंध यानी लॉक-इन अवधि को लेकर भी राहत दी गई है। यदि आवास का आवंटन निर्माण अवधि के दौरान किया जाता है तो 10 साल की अवधि की गणना आवंटन आदेश में दी गई प्रस्तावित पूर्णता तिथि या हितग्राही द्वारा भवन की पूरी राशि जमा करने की तारीख, इनमें से जो पहले हो, उससे की जाएगी। इससे निर्माण में देरी के कारण हितग्राही की लॉक-इन अवधि अनावश्यक रूप से बढ़ने से बच सकेगी।
RDA की ओर से बुकिंग और राशि जमा करने की ऑनलाइन प्रक्रिया को भी आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। प्राधिकरण का कहना है कि इसका उद्देश्य हितग्राहियों को भुगतान और अन्य प्रक्रियाओं के लिए अनावश्यक परेशानी से बचाना और सेवाओं को ज्यादा सरल बनाना है।
बैठक में प्राधिकरण के प्लेसमेंट कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत वृद्धि का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा आवंटियों, हितग्राहियों और कर्मचारियों से जुड़े अन्य मामलों पर भी चर्चा की गई।
RDA अध्यक्ष नंद कुमार साहू ने कहा कि प्राधिकरण से हजारों परिवारों की उम्मीदें और भविष्य जुड़े हैं, इसलिए हर निर्णय में आम नागरिक और हितग्राही का हित प्राथमिकता में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में देरी का खामियाजा किसी आवंटी या हितग्राही को नहीं भुगतना चाहिए। इसी सोच के तहत वास्तविक निर्माण प्रगति के आधार पर किश्तों के पुनर्निर्धारण और देरी की अवधि में ब्याज नहीं लेने का फैसला किया गया है।
उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा ने कहा कि भुगतान की समय-सीमा बढ़ाने, सरचार्ज कम करने, निर्माण में देरी पर किश्तों के पुनर्निर्धारण और DLP को 5 साल तक करने जैसे फैसले सीधे तौर पर आवंटियों और हितग्राहियों की व्यावहारिक परेशानियों से जुड़े हैं। वहीं CEO अवनीश कुमार शरण ने कहा कि संचालक मंडल के फैसलों को लागू करने के लिए जरूरी प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक कार्रवाई की जाएगी।
