रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरों में सड़क, आवास और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार वित्तीय संसाधन जुटाने के नए विकल्पों पर काम कर रही है। इसी दिशा में बुधवार को नवा रायपुर में अर्बन चैलेंज फंड और शहरी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण पर क्षेत्रीय कार्यशाला रखी गई है। इसमें शहरी विकास के लिए निवेश जुटाने, नगर निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा होनी है।
राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) की इस पहल में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित था। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू और उप मुख्यमंत्री अरुण साव को भी इसमें शामिल होना था।
HUDCO और सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ सहयोग की पहल
कार्यशाला के दौरान नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से HUDCO और सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ दो अलग-अलग समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी दी गई थी। इनका उद्देश्य नगर निकायों की वित्तीय और संस्थागत क्षमता मजबूत करना, बेहतर शहरी नियोजन को बढ़ावा देना और विकास परियोजनाओं को तैयार करने में सहयोग बढ़ाना है।
क्या है अर्बन चैलेंज फंड?
अर्बन चैलेंज फंड शहरी विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने से जुड़ी पहल है। इसके तहत शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए ऐसी परियोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया जाता है, जिनमें वित्तीय व्यवहार्यता हो और निवेश आकर्षित किया जा सके।
कार्यशाला में अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) के माध्यम से परियोजनाओं को निवेश के योग्य बनाने, वित्तीय योजनाएं तैयार करने और लंबे समय तक उनके बेहतर प्रबंधन जैसे विषयों पर भी चर्चा प्रस्तावित है।
नगर निकायों को कैसे मिलेगा फायदा?
शहरों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, आवास और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त धन की जरूरत होती है। ऐसे में नगर निकायों को पारंपरिक सरकारी सहायता के अलावा दूसरे वित्तीय विकल्पों की जानकारी और विशेषज्ञों का सहयोग मिलना उपयोगी हो सकता है।
कार्यशाला में म्युनिसिपल बॉन्ड, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और HUDCO की वित्तीय सहायता जैसे विकल्पों पर भी चर्चा का कार्यक्रम है। इन माध्यमों से परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने और शहरी विकास को गति देने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
छत्तीसगढ़ के शहरों में बढ़ती आबादी और बुनियादी सुविधाओं की जरूरत को देखते हुए यह पहल महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि तैयार की गई योजनाओं को कितनी तेजी से लागू किया जाता है और उनका फायदा आम नागरिकों तक किस तरह पहुंचता है।
