रायपुर। सोशल मीडिया पर AI की मदद से तैयार किए गए फर्जी और एडिटेड वीडियो को लेकर छत्तीसगढ़ पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। रायपुर में पिछले कुछ समय के दौरान AI-generated और manipulated content से जुड़े कई मामलों में FIR दर्ज की गई है।
AI तकनीक ने जहां कंटेंट बनाने को आसान किया है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो को बदलकर ऐसा कंटेंट तैयार किया जा सकता है जो पहली नजर में वास्तविक दिखाई देता है।
राजनीतिक लोगों से जुड़े वीडियो भी जांच के दायरे में
रिपोर्टों के अनुसार रायपुर में सामने आए मामलों में राजनीतिक नेताओं से जुड़े कथित AI-generated और manipulated वीडियो भी शामिल हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित मामलों की जांच शुरू की है।
सोशल मीडिया पर तेजी से फैलता है फर्जी कंटेंट
AI से तैयार वीडियो की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसे सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से फैलाया जा सकता है। कोई व्यक्ति बिना सत्यता जांचे वीडियो को शेयर कर देता है और कुछ ही समय में वह हजारों लोगों तक पहुंच जाता है।
ऐसे वीडियो से किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंच सकता है और समाज में भ्रम की स्थिति भी बन सकती है।
Deepfake और सामान्य एडिटेड वीडियो में क्या अंतर है?
सामान्य वीडियो editing में किसी वीडियो को काटना, जोड़ना या उसमें आवाज और text बदलना शामिल हो सकता है। वहीं deepfake या AI-generated content में तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या व्यवहार तक बदला जा सकता है।
यही कारण है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो की सत्यता जांचना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
वीडियो शेयर करने से पहले क्या करें?
किसी भी विवादित वीडियो को तुरंत forward या share न करें। सबसे पहले देखें कि वीडियो किस account से आया है। अगर वीडियो किसी बड़े नेता, अधिकारी या संस्था से जुड़ा है तो उसके official social media account या website पर जानकारी जरूर जांचें।
अगर वीडियो को लेकर संदेह है तो उसे आगे फैलाने से बचना ही बेहतर है।
पुलिस की कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?
AI का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने, किसी व्यक्ति की छवि खराब करने या विवाद पैदा करने के लिए किया जाता है तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया users को भी सावधान रहने की जरूरत है।
