International Day of Remembrance and Tribute to the Victims of Terrorism
अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पीड़ितों की स्मृति एवं श्रद्धांजलि दिवस हर वर्ष 21 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आतंकवाद के पीड़ितों को याद करना, उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना और आतंकवाद से प्रभावित लोगों के अधिकारों तथा गरिमा की रक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना है।
कब और क्यों शुरू हुआ?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 दिसंबर 2017 को प्रस्ताव 72/165 के माध्यम से 21 अगस्त को International Day of Remembrance and Tribute to the Victims of Terrorism घोषित किया। यह दिवस पहली बार 21 अगस्त 2018 को मनाया गया।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आतंकवाद से प्रभावित लोगों को अक्सर शारीरिक चोट, मानसिक आघात, सामाजिक अलगाव और आर्थिक कठिनाइयों जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई पीड़ित और उनके परिवार लंबे समय तक इन परिस्थितियों से जूझते रहते हैं।
21 अगस्त ही क्यों?
21 अगस्त की तारीख आतंकवाद के पीड़ितों की स्मृति को वैश्विक स्तर पर सम्मान देने के लिए निर्धारित की गई है। संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य इस दिन के माध्यम से पीड़ितों की आवाज को सामने लाना और यह सुनिश्चित करना है कि आतंकवाद से प्रभावित लोगों के अधिकारों तथा जरूरतों को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में पर्याप्त महत्व मिले।
दिवस का मुख्य उद्देश्य
इस अंतरराष्ट्रीय दिवस के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:
आतंकवाद के पीड़ितों को याद करना और उन्हें श्रद्धांजलि देना।
पीड़ितों और उनके परिवारों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
आतंकवाद के कारण होने वाले शारीरिक और मानसिक प्रभावों को समझना।
पीड़ितों को न्याय और सहायता उपलब्ध कराने के महत्व को रेखांकित करना।
आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।
पीड़ितों की गरिमा और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना।
पीड़ितों की आवाज को महत्व
संयुक्त राष्ट्र इस बात पर जोर देता है कि आतंकवाद से लड़ाई केवल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इस लड़ाई के केंद्र में वे लोग भी होने चाहिए, जिन्होंने आतंकवादी हिंसा में अपने परिवार के सदस्यों को खोया या स्वयं इसका सामना किया।
International Day of Remembrance and Tribute to the Victims of Terrorism इसी विचार को सामने लाता है कि आतंकवाद के पीड़ितों को भुलाया नहीं जाना चाहिए। उनकी पीड़ा, संघर्ष और अधिकारों को वैश्विक स्तर पर सम्मान और प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
भारत के संदर्भ में महत्व
भारत लंबे समय से आतंकवादी हिंसा की चुनौती का सामना करता रहा है। ऐसे में यह दिवस देश के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह दिन आतंकवादी घटनाओं में जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों को याद करने तथा उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने का अवसर देता है।
21 अगस्त का संदेश स्पष्ट है कि आतंकवाद से प्रभावित लोगों की पीड़ा को याद रखना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और ऐसी हिंसा के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट रहना।
