रायपुर। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में क्षतिग्रस्त हुए 500 से ज्यादा पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग विशेषज्ञों की मदद लेने जा रहा है। गरियाबंद और धमतरी जिले के वन क्षेत्र में पेड़ों को हुए नुकसान के बाद उन्हें बचाने के लिए खास तकनीक अपनाने की तैयारी है।
पेड़ों को बचाने के लिए अपनाई जाएगी खास तकनीक
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, टाइगर रिजर्व के करका गांव में पेड़ों की छाल को चारों ओर से हटाए जाने के मामले सामने आए हैं। इस प्रक्रिया से पेड़ों तक पोषक तत्वों का पहुंचना बाधित हो जाता है और धीरे-धीरे पेड़ सूखने लगते हैं।
वन विभाग के निरीक्षण में करीब 2,500 पेड़ों को इस तरह नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। इनमें 500 से ज्यादा पेड़ हाल ही में क्षतिग्रस्त हुए हैं, इसलिए उन्हें बचाने की संभावना अधिक मानी जा रही है।
ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक से मिलेगी मदद
पेड़ों को बचाने के लिए ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक अपनाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें पेड़ के क्षतिग्रस्त हिस्से के ऊपर स्वस्थ शाखा या उपयुक्त पौध सामग्री को जोड़कर पोषक तत्वों के प्रवाह को दोबारा बहाल करने की कोशिश की जाती है।
इस काम के लिए विशेषज्ञ विजय निशांत, जिन्हें पेड़ों के संरक्षण के क्षेत्र में ‘ट्री डॉक्टर’ के नाम से जाना जाता है, तकनीकी मदद देने के लिए टाइगर रिजर्व का दौरा करेंगे। वे पेड़ों की स्थिति का आकलन कर यह बताएंगे कि किन पेड़ों को किस तरीके से बचाया जा सकता है।
जंगल और जैव विविधता को बचाना जरूरी
उदंती-सीतानदी का जंगल वन्यजीवों और जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में पेड़ों को बचाने की यह कोशिश केवल वन संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगल के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने से भी जुड़ी है।
अब विशेषज्ञों की सलाह और वन विभाग की निगरानी से यह तय होगा कि कितने पेड़ों को दोबारा स्वस्थ किया जा सकता है। इस पहल की सफलता से भविष्य में क्षतिग्रस्त पेड़ों के संरक्षण के लिए भी मदद मिल सकती है।
