रायपुर। बच्चों में जन्मजात हृदय रोग एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है, लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार से कई बच्चों को बेहतर जीवन दिया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर कलिंगा यूनिवर्सिटी, रायपुर में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए “अनसुनी धड़कन सुनें: अफ्रीका में जन्मजात हृदय रोग की देखभाल” विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों ने सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट और ग्लोबल CHD एलायंस के को-फाउंडर डॉ. अतुल सुरेंद्र प्रभु के साथ संवाद किया। डॉ. प्रभु ने जन्मजात हृदय रोग से जुड़ी चिकित्सा चुनौतियों के साथ उन बच्चों और परिवारों की वास्तविक परिस्थितियों को भी सामने रखा, जिन्हें समय पर विशेषज्ञ उपचार और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
उन्होंने कहा कि हर आंकड़े के पीछे एक बच्चा और एक परिवार होता है। बीमारी की समय पर पहचान, सही उपचार और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच किसी बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकती है। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं की समान पहुंच को लेकर भी विशेष जोर दिया।
डॉ. प्रभु ने भारत, ऑस्ट्रेलिया और ताइवान में अपने पेशेवर अनुभव साझा करते हुए वैश्विक सहयोग, प्रशिक्षण, तकनीक और ज्ञान के आदान प्रदान की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बच्चों के हृदय रोगों से निपटने के लिए केवल सीमित अवधि के चिकित्सा अभियान पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ तैयार करने और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
संवाद के दौरान टेलीमेडिसिन, एआई आधारित डायग्नोसिस, आधुनिक उपचार तकनीकों और मोबाइल कार्डियक केयर जैसी संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इन तकनीकों के जरिए दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की संभावनाओं पर विद्यार्थियों को जानकारी दी गई।
कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अकादमिक जानकारी से आगे बढ़कर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने का अवसर भी बना। अलग-अलग देशों और समुदायों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति, इलाज में आने वाली बाधाओं और भविष्य के पेशेवरों की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
कलिंगा यूनिवर्सिटी की ओर से बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को वैश्विक विशेषज्ञों और महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों से जोड़ने के लिए इस तरह के संवाद कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को अपने विषय के साथ वैश्विक स्तर की चुनौतियों को समझने और संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम का समन्वय अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश एवं समन्वय टीम ने किया। टीम में श्रीमती परविंदर शेष, श्री जितेश महंत, सुश्री यशु रायकर और सुश्री आयुषी गंगराडे शामिल रहे।
डॉ. अतुल सुरेंद्र प्रभु पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और जन्मजात हृदय रोगों के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं तथा वर्तमान में नारायण इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज सहित अन्य संस्थानों से जुड़े हैं। उनके पेशेवर अनुभव में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया और ताइवान में काम करना भी शामिल रहा है।
कार्यक्रम का संदेश यही रहा कि बच्चों के हृदय स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, समय पर जांच और बेहतर उपचार की पहुंच बढ़ाना जरूरी है। हर धड़कन मायने रखती है और हर बच्चे को स्वस्थ जीवन का अवसर मिलना चाहिए।
