रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्राकृतिक सौंदर्य, आदिवासी संस्कृति, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक विरासत को देश और दुनिया के सामने लाने के साथ पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने की तैयारी है। सरकार का फोकस बस्तर से लेकर सिरपुर, चित्रकोट, मैनपाट और जशपुर तक पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर है।
18 पर्यटन संपत्तियों से 500 करोड़ निवेश की उम्मीद
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इन्हें लीज-सह-विकास मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। सरकार के अनुमान के मुताबिक इस प्रक्रिया से करीब 500 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित हो सकता है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर बनने की संभावना है।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी 500 करोड़ से ज्यादा के निवेश की तैयारी
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने बताया कि पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में बड़े निजी निवेश की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। मई 2026 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई बैठक में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में 500 करोड़ रुपए से अधिक निवेश की योजना साझा की थी। सरकार का कहना है कि इस तरह के निवेश से पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
चित्रकोट और सिरपुर पर खास जोर
बस्तर को प्रदेश के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में विकसित करने की तैयारी है। चित्रकोट जलप्रपात को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले सिरपुर के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार करने की योजना है। मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटक सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है।
बस्तर के जंगल, झरने और आदिवासी संस्कृति को इको-टूरिज्म से जोड़ने की योजना भी है। केंद्र सरकार ने भी छत्तीसगढ़ के पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता मंजूर की है। जनवरी 2026 तक राज्य को पर्यटन अधोसंरचना के लिए कुल 448.15 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत होने की जानकारी केंद्र सरकार ने दी थी।
भोरमदेव कॉरिडोर को 145.99 करोड़ की मंजूरी
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भोरमदेव कॉरिडोर का विकास भी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। केंद्र सरकार ने स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 145.99 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इसके अलावा डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर के विकास के लिए 48.44 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है।
फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर से भी बढ़ेंगी संभावनाएं
छत्तीसगढ़ में फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने फिल्म सिटी के लिए 95.79 करोड़ और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के लिए करीब 52 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। दोनों परियोजनाओं से पर्यटन, संस्कृति, फिल्म निर्माण और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन से स्थानीय लोगों को जोड़ने पर जोर
सरकार की रणनीति में पर्यटन की कमाई का फायदा स्थानीय लोगों तक पहुंचाना भी शामिल है। होमस्टे, स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प, गाइड सेवा और पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबार को बढ़ावा देने की योजना है। युवाओं को पर्यटक गाइड, आतिथ्य, पर्यटन संचालन, फिल्म निर्माण और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगी छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग
सरकार छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, सांस्कृतिक और इको-एथनिक पर्यटन के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर राज्य की भागीदारी, फिल्म और ओटीटी के जरिए प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच और विदेशी इन्फ्लुएंसर्स के फैम टूर जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करने की योजना है।
सरकार का लक्ष्य पर्यटन को केवल घूमने-फिरने की गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय इसे निवेश, रोजगार, स्थानीय कारोबार और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ना है। अगर प्रस्तावित परियोजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरती हैं तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बढ़ सकते हैं।
