रायपुर। हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में SMC Heart Institute Raipur ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए तीन मरीजों में अत्याधुनिक लीडलेस पेसमेकर का सफल प्रत्यारोपण किया है। संस्थान के अनुसार, इस तकनीक के माध्यम से मरीजों को पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में कम जटिलताओं के साथ आधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
लीडलेस पेसमेकर में छाती पर बड़ा चीरा लगाने और अलग से तार (लीड) डालने की आवश्यकता नहीं होती। यह छोटा उपकरण सीधे हृदय के भीतर प्रत्यारोपित किया जाता है। इससे संक्रमण, रक्तस्राव और फेफड़े से जुड़ी कुछ जटिलताओं का जोखिम कम होता है। प्रक्रिया के बाद मरीज को कम असुविधा होती है और सामान्य पेसमेकर की तुलना में रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेज हो सकती है। अस्पताल के अनुसार, सफल प्रक्रिया के बाद मरीजों को अगले दिन डिस्चार्ज किया जा सकता है।
तीनों मरीजों की अलग-अलग चिकित्सकीय जरूरतों के अनुसार पेसमेकर लगाए गए। इनमें एक मरीज को पहले पारंपरिक तार वाला पेसमेकर लगाया गया था, जिसके बाद संक्रमण की समस्या सामने आई थी और दवाइयों से अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था। ऐसे मरीज में लीडलेस पेसमेकर का सफल प्रत्यारोपण किया गया। वहीं अन्य मरीजों में AV ड्यूल चैंबर और सिंगल चैंबर पेसमेकर तकनीक का उपयोग किया गया।
अस्पताल के विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सकों की टीम ने सावधानी और विशेषज्ञता के साथ तीनों प्रक्रियाएं पूरी कीं। वर्तमान में तीनों मरीजों की स्थिति संतोषजनक बताई गई है।
इस उपलब्धि में डॉ. सतीश सूर्यवंशी, डॉ. एस.एस. मोहंती, डॉ. वेद प्रकाश वर्मा सहित कैथ लैब स्टाफ श्रीदानेश, श्रीदेव और पूरी टीम का योगदान रहा।
अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के मरीजों को महानगरों जैसी अत्याधुनिक हृदय चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है। नई तकनीकों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
