रायपुर। होली के अवसर पर अग्रणी साहित्यिक संस्था वक्ता मंच द्वारा पेंशनर्स समाज भवन, रायपुर में रंगारंग काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘होली की हुड़दंग कवियों के संग’ शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ और युवा कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को साहित्य और हास्य के रंगों से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ साहित्यकार चेतन भारती को पारंपरिक अंदाज में ‘महामूर्ख’ का ताज पहनाया गया। यह सम्मान होली की हंसी ठिठोली की परंपरा के तहत दिया गया, जिसे उपस्थित कवियों और श्रोताओं ने उत्साह के साथ सराहा।
इस अवसर पर कवियों ने फूलों की होली खेलकर प्रेम और सौहार्द्र का संदेश दिया तथा प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे इस पर्व को आपसी भाईचारे और सद्भाव के साथ मनाएं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वयं चेतन भारती रहे, जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय स्तर के मंचीय कवि कुमार जगदली ने की। सिंधी भाषा के वरिष्ठ कवि राजकुमार मसंद और कर्मचारी नेत्री ज्योति शुक्ला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। काव्य गोष्ठी का प्रभावी संचालन संस्था के अध्यक्ष राजेश पराते ने किया तथा संयोजन की जिम्मेदारी शुभम साहू ने निभाई।
कार्यक्रम के दौरान कवयित्री कल्याणी तिवारी ‘कोकि’ के काव्य संग्रह ‘मन के मनके’ का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही वरिष्ठ कवि राकेश अग्रवाल और युवा सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत यदु का जन्मदिन भी उत्साहपूर्वक मनाया गया।
प्रमुख काव्य प्रस्तुतियां
राहुल साहू ने प्रेम और विरह के भावों से भरी पंक्तियां सुनाईं
ये साल भी एक सवाल रह गया
तुमसे मिलने का मलाल रह गया
होली के सारे रंग रखे हैं हाथ में
बस तेरे नाम का गुलाल रह गया
कुमार जगदली ने बृज की होली का मनोहारी चित्र प्रस्तुत किया
वृंदावन नटवर छाए होरी में
रंग गुलाल उड़ाए राधिका
ग्वाले झांझ बजाए होरी में
एस एन जोशी ने समकालीन हालात पर व्यंग्य करते हुए कहा
इल्जाम ऐ सौ गुनाह अपने सर लिए हुए
हम सब खड़े हैं हाथों में पत्थर लिए हुए
जंग सब खत्म हुई अमन हुआ बहाल
कब आएगा अखबार ये खबर लिए हुए
रश्मि शकुंतला मिश्रा ने राधा कृष्ण के संग खेली जा रही होली का भावपूर्ण चित्र खींचा
प्रीत लगी होली यह खेले राधा कृष्ण संग
नीला पीला हरा लाल भरा है गुलाल नभ
फाग गूंजे चहूं ओर हंसते ही रहते हैं
पूजा अग्रवाल ने प्रकृति और रंगों की छटा को शब्द दिए
धरती गगन में कैसे उड़े हैं गुलाल
रुत मस्तानी देख हुए नैन निहाल
राकेश अग्रवाल ने अपने चुटीले अंदाज में व्यंग्य प्रस्तुत किया
ट्रंप चाचा को नोबल दे दो वरना होंगे क्रुद्ध
चचा हो गए क्रुद्ध तो नहीं रुकेगा युद्ध
सुषमा प्रेम पटेल ने फागुन की सुगंध और बृज की रास को स्वर दिया
आया फागुन बृज महकाया बजे मुरलिया तान
रंग बसंती रास रचाए छेड़े श्याम सुजान
मुकेश सिंह राठौर ने उल्लास भरी प्रस्तुति दी
रग रग रंग रहा आज सब रंग ही में
कान्हा संग राधा आई साथ लिए रंग लाल
रंगने को श्याम आज गोप आई होली रे
इसके अलावा गोष्ठी में राजेश पराते, शुभम साहू, चेतन भारती, कुमार जगदली, राजकुमार मसंद, ज्योति शुक्ला, राजाराम रसिक, कमल सूर्यवंशी, गंगा शरण पासी, अर्चना श्रीवास्तव, रामचंद्र श्रीवास्तव, प्रशांत यदु, डॉ इंद्रदेव यदु, डॉ उदयभान सिंह चौहान, मन्नू लाल यदु, सुषमा पटेल, सुनीता वैष्णव, कल्याणी तिवारी, विवेक बेहरा, रश्मि शकुंतला मिश्रा, राकेश अग्रवाल, मुकेश सिंह राठौर, डॉ सरोज साव, सत्येंद्र तिवारी, एस एन जोशी, लवकुश तिवारी, संजय देवांगन, विवेक कुमार, पुष्पांजलि साहू, मो. हुसैन, तामेश्वर साहू, दीपमाला पाण्डेय, पूजा अग्रवाल, यशवंत यदु, रिक्की बिंदास, राहुल साहू, द्वारिका श्रीवास, सतीश कुमार सोनी और सीमा पांडेय सहित लगभग 40 कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम का समापन फूलों की होली के साथ हुआ। रंग, हास्य, व्यंग्य और साहित्य के संग यह आयोजन होली की सच्ची भावना को साकार करता नजर आया।
