रायपुर। वन्यजीवों और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नया रायपुर स्थित अरण्य भवन में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। 7 अक्टूबर को विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताएं हुईं, जबकि 8 अक्टूबर को आयोजित पुरस्कार समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। वन्यजीव सप्ताह 2026 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने चित्रकला, रंगोली, निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी और लघु दृश्यचित्र निर्माण जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया।
यह आयोजन छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के रायपुर वन मंडल ने कलिंगा विश्वविद्यालय के हरित समूह और प्राणीशास्त्र विभाग के सहयोग से किया। कार्यक्रम की थीम “जुड़ते प्राकृतिक आवास, फलते-फूलते वन्यजीव” रखी गई थी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्थानीय जैव विविधता, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व के महत्व से जोड़ना था।
7 अक्टूबर को आयोजित प्रतियोगिताओं में कुल 124 प्रतिभागियों ने भाग लिया। वन्यजीव जागरूकता प्रश्नोत्तरी में छह दल शामिल हुए, जबकि चित्रकला में 52 प्रतिभागियों, रंगोली में 19 दलों और निबंध लेखन में 16 विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय सहित वन विभाग के अधिकारियों ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में विद्यार्थियों से वन्यजीवों की पहचान, उनके प्राकृतिक आवास और संरक्षण से जुड़े सवाल पूछे गए। इसका संचालन रायपुर वनमंडलाधिकारी पंकज राजपूत और कलिंगा विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापक मानसी मजूमदार ने किया। इसके अलावा विद्यार्थियों ने चित्रकला, रंगोली और निबंध के माध्यम से प्रकृति और वन्यजीवों को बचाने का संदेश दिया।
प्रतियोगिताओं के अलावा सप्ताहभर विद्यार्थियों के लिए कई गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें कागज से आकृतियां बनाना, घोंसलों के प्रतिरूप तैयार करना और बीजगोलक बनाना शामिल था। वन्यजीव छायाचित्रण, लघु दृश्यचित्र निर्माण, प्रकृति भ्रमण और आसपास मौजूद जीवों की पहचान जैसी गतिविधियों से विद्यार्थियों को प्रकृति को करीब से समझने का अवसर मिला।
लघु दृश्यचित्र निर्माण प्रतियोगिता में कलिंगा विश्वविद्यालय के देवेश मिंज ने पहला स्थान हासिल किया। सिद्धांत नागपुरे दूसरे और वर्षा साहू तीसरे स्थान पर रहे। निबंध प्रतियोगिता में केंद्रीय विद्यालय की श्रेया साहू विजेता बनीं। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, उपरवारा की शैल्या साहू दूसरे और पीएम श्री स्वामी आत्मानंद विद्यालय, माना कैंप के आकाश दास तीसरे स्थान पर रहे। हेमा और दीपिका साहू को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
वन्यजीव प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में कृष्णा पब्लिक स्कूल की भविष्या और काव्या के सिंह दल ने पहला स्थान प्राप्त किया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, उपरवारा की शैल्या और रेशमा का भेड़िया दल दूसरे तथा पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, माना कैंप की तितिक्षा और आयुष का चीता दल तीसरे स्थान पर रहा। पीएम श्री स्वामी आत्मानंद विद्यालय, माना कैंप और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी के दल क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर रहे।
महाविद्यालय वर्ग की रंगोली प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर की भूमिका देवांगन और उनके दल ने पहला स्थान प्राप्त किया। कलिंगा विश्वविद्यालय के बीजेडबीसी प्रथम सत्र की सानिका और उनके दल को दूसरा तथा जीएनसी, नवागांव की ज्योति साहू और उनके दल को तीसरा स्थान मिला। कलिंगा विश्वविद्यालय के बीजेडबीसी पांचवें सत्र की ग्रेल्डी और तीसरे सत्र की सिमरन बोरकर के दल को सांत्वना पुरस्कार मिला।
विद्यालय वर्ग की रंगोली प्रतियोगिता में क्रिस्टेल हाउस इंडिया विद्यालय की तोमन और उनके दल ने पहला स्थान हासिल किया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी की राखी पटेल और उनके दल को दूसरा तथा पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय की संजना वर्मा और उनके दल को तीसरा स्थान मिला। गनोद, माना कैंप और उपरवारा के विद्यालयों के प्रतिभागियों को भी सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
विद्यालय वर्ग की चित्रकला प्रतियोगिता में क्रिस्टेल हाउस इंडिया विद्यालय की सुनिधि साहू प्रथम और मीनाक्षी सिन्हा द्वितीय रहीं। कृष्णा पब्लिक स्कूल की भविष्या ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। कुमकुम साहू, काव्या साहू और खुशी सिदार को सांत्वना पुरस्कार मिला। महाविद्यालय वर्ग में कलिंगा विश्वविद्यालय की नैसा कुंडू ने पहला स्थान हासिल किया। शासकीय नवीन महाविद्यालय, नया रायपुर की मीनाक्षी चंद्राकर दूसरे और पंत ज्ञानेश्वर विद्यालय के दीपक ध्रुव तीसरे स्थान पर रहे।
समापन समारोह में 65 विद्यार्थियों और 11 संकाय सदस्यों ने भाग लिया। आयोजकों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और वन विभाग के अधिकारियों के योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश दिया गया कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति जागरूकता, स्थानीय जीवों की पहचान और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा में आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
