नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (Scheduled Caste – SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों को ही मिलेगा। कोर्ट के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो वह एससी श्रेणी के तहत मिलने वाले लाभों का पात्र नहीं रहेगा।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एससी दर्जा ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और जाति व्यवस्था से जुड़ा हुआ है, जो मुख्य रूप से हिंदू समाज में पाया गया। बाद में इसे सिख और बौद्ध धर्म में भी मान्यता दी गई। इसलिए यह लाभ केवल इन तीन धर्मों तक सीमित रहेगा।
कानूनी आधार
यह निर्णय संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 पर आधारित है।
* 1956 में सिख धर्म को शामिल किया गया
* 1990 में बौद्ध धर्म को शामिल किया गया
अन्य धर्मों (जैसे इस्लाम और ईसाई धर्म) को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है।
धर्म परिवर्तन का क्या असर होगा?
अगर कोई व्यक्ति:
* हिंदू/सिख/बौद्ध धर्म छोड़कर
* किसी अन्य धर्म को अपनाता है
तो उसे SC आरक्षण, सरकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
फैसले का प्रभाव
* शिक्षा और सरकारी नौकरी में आरक्षण पर असर
* राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रभाव
* दलित ईसाई और दलित मुस्लिम समुदाय की मांगों पर असर
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह फैसला लंबे समय से चल रही बहस को फिर से चर्चा में लाता है कि क्या एससी का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिना कानून में बदलाव के यह संभव नहीं है।
